॥ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ , निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
Tuesday, 1 March 2016
बलवानप्यशक्तोऽसौ धनवानपि निर्धनः |
श्रुतवानपि मूर्खोऽसौ यो धर्मविमुखो जनः ||
अर्थात् : जो व्यक्ति धर्म ( कर्तव्य ) से विमुख होता है वह ( व्यक्ति ) बलवान् हो कर भी असमर्थ , धनवान् हो कर भी निर्धन तथा ज्ञानी हो कर भी मूर्ख होता है |
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